राजनीति में अपनी अलग राह चुनना आसान नहीं होता, खासकर तब जब विरोध बाहर से पहले घर के भीतर से शुरू हो। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कायस्थ बड्ढा गांव से निकलकर कुंवर बासित अली ने भाजपा की राजनीति में करीब डेढ़ दशक का सफर तय किया है। कभी उनके भाजपा से जुड़ने का परिवार में विरोध हुआ, लेकिन उन्होंने संगठन में काम करना जारी रखा और अब भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी तक पहुंच गए हैं।
बासित अली ने वर्ष 2011 में भाजपा की सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति की शुरुआत की। उस समय उनके पिता हामिद अली गांव के प्रधान थे और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए थे। बेटे के भाजपा में जाने की खबर सामने आने के बाद परिवार में काफी नाराजगी हुई।
बासित अली के अनुसार, शुरुआती दौर में उन्हें पिता और समाज दोनों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। राजनीतिक मतभेद इतना बढ़ा कि उन्हें मारपीट तक झेलनी पड़ी। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें घर छोड़कर कुछ समय बाहर रहना पड़ा।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान पिता और बेटे की राजनीतिक पसंद खुलकर आमने-सामने आ गई। एक तरफ परिवार का जुड़ाव बसपा से था, जबकि बासित अली भाजपा के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे थे।
इसी दौरान भाजपा के एक कार्यक्रम को लेकर घर में विवाद हुआ। बाद में चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि बासित अली ने अपना राजनीतिक रास्ता बदलने के बजाय संगठन में काम जारी रखने का फैसला किया। समय के साथ परिवार का विरोध कम हुआ और बासित अली की राजनीतिक सक्रियता बढ़ती चली गई।
भाजपा में शुरुआत एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में करने वाले बासित अली ने धीरे-धीरे संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। वह युवा मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े और मेरठ में संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
इसके बाद उन्हें जिला स्तर पर जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2012 में वह भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने। आगे चलकर उन्होंने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मेरठ में नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर मुस्लिम समाज के बीच संपर्क अभियान चलाने के बाद भी वह चर्चा में आए। भाजपा के सदस्यता अभियान के दौरान मुस्लिम समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ने के प्रयासों ने संगठन में उनकी भूमिका को और मजबूत किया।
बासित अली ने उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने के लिए कई संगठनात्मक कार्यक्रमों में भाग लिया। पसमांदा समाज और मुस्लिम राजपूत समाज के बीच संपर्क बढ़ाने के प्रयासों के साथ उन्होंने सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पार्टी का संदेश पहुंचाने पर भी जोर दिया। मदरसों में योग कार्यक्रमों और ‘मोदी मित्र’ जैसे अभियानों से जुड़ी उनकी गतिविधियां भी उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा रहीं।
अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी
करीब 15 वर्ष तक संगठन में अलग-अलग स्तरों पर काम करने के बाद अब कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अल्पसंख्यक समाज के बीच संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने और पार्टी के साथ नए लोगों को जोड़ने की होगी। बासित अली की राजनीतिक यात्रा का सबसे अहम पहलू यह है कि जिस फैसले को लेकर उन्हें शुरुआती दौर में अपने ही घर में विरोध झेलना पड़ा, उसी राजनीतिक रास्ते पर चलते हुए वह भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे हैं।
करीब 15 वर्षों के संगठनात्मक सफर में उन्होंने बूथ स्तर से लेकर जिला, प्रदेश और अब राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियां संभालीं। उनके राजनीतिक सफर को भाजपा के भीतर अल्पसंख्यक समाज तक संगठन की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।



