चंपावत में धामी के गढ़ पर भाजपा की पकड़ और मजबूत, कांग्रेस खेमे के 31 चेहरे भगवा खेमे में

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हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्वाचन जिले चंपावत में भाजपा ने विपक्षी खेमे में बड़ी सेंध लगाई है। नगर पंचायत पाटी के अध्यक्ष नारायण लाल समेत 31 जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, नगर निकायों के सभासद, पूर्व यूथ कांग्रेस पदाधिकारी और छात्र नेता भी शामिल हैं। एक ही क्षेत्र से इतने जनप्रतिनिधियों के भाजपा में आने को पार्टी चुनाव से पहले अपने पक्ष में बन रहे माहौल के तौर पर पेश कर रही है।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में सभी नए सदस्यों का स्वागत किया गया। पार्टी के अनुसार चंपावत जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद अधिकारी की प्रेरणा से यह ज्वाइनिंग हुई है। लोहाघाट क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य भाजपा में शामिल हुए।

इस घटनाक्रम की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि चंपावत मुख्यमंत्री धामी का निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में यहां विपक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों का भाजपा में आना केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर असर डालने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है। भाजपा इसे सरकार के विकास कार्यों और मुख्यमंत्री के नेतृत्व के प्रति जनप्रतिनिधियों के भरोसे के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह अपने स्थानीय संगठन और जनाधार को संभालने की चुनौती है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि एक क्षेत्र से बड़ी संख्या में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का पार्टी में शामिल होना प्रदेश में भाजपा के पक्ष में बन रहे माहौल का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि यह माहौल अब सर्वे में भी दिखाई देने लगा है। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि उसी सरकार के साथ खड़ा होना चाहता है, जिसके कार्यकाल में उसके क्षेत्र में विकास की उम्मीद पूरी होती है।

भाजपा ने नए सदस्यों को आगामी चुनावी गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि नए सदस्यों की क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार उन्हें संगठन और चुनावी गतिविधियों में जिम्मेदारी दी जाएगी। यानी ज्वाइनिंग के साथ ही इन्हें चुनावी जमीन पर सक्रिय करने की रणनीति भी दिखाई दे रही है।

चंपावत में हुई यह राजनीतिक हलचल ऐसे समय हुई है जब उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा जहां लगातार अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस के सामने अपने स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों को एकजुट रखने की चुनौती है। ऐसे में चंपावत की यह ज्वाइनिंग आने वाले दिनों में जिले की राजनीति में कितनी बड़ी भूमिका निभाती है, यह देखने वाली बात होगी।