दिल्ली। एशिया कप में रविवार को पाकिस्तान पर जीत के बाद भारतीय टीम ने प्रतिद्वंद्वियों के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। इस पर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि यह एक सामूहिक निर्णय था जिसे टीम प्रबंधन और बीसीसीआई ने समर्थन दिया था। यह निश्चित रूप से क्षणिक निर्णय नहीं था।
दरअसल, भारत-पाक मैच (India Pakistan No Handshake Controversy) में जैसे ही कप्तान सूर्यकुमार यादव (India Captain Suryakumar Yadav) ने एक छक्के के साथ मुकाबला समाप्त किया, उन्होंने डगआउट की ओर मुड़कर बिना प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों की ओर देखे ही चलना शुरू कर दिया।
पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने साथियों को पारंपरिक हाथ मिलाने के लिए कतार में खड़ा किया और भारतीय डगआउट की ओर आधा रास्ता भी चले गए, लेकिन भारतीय टीम ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मैच के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में सूर्या ने कहा,
“यह टीम का निर्णय था। हम केवल खेलने आए थे। हमने उन्हें जवाब दिया। कुछ चीजें खेल भावना से परे होती हैं। वहीं, टीम शीट नहीं बदलने का निर्णय भी स्टाफ के एक महत्वपूर्ण सदस्य द्वारा लिया गया था, जो पाकिस्तान से संबंधित सभी मामलों पर अपने रुख के बारे में बहुत स्पष्ट हैं, लेकिन हाथ न मिलाने का निर्णय निश्चित रूप से बीसीसीआई द्वारा समर्थन प्राप्त था। हम अपनी सरकार और बीसीसीआई के साथ एकजुट हैं।”
वहीं, पाकिस्तानी कप्तान मैच के बाद प्रस्तुति समारोह में नहीं आए। पाकिस्तानी कोच माइक हेसन ने कहा कि हाथ न मिलाने की घटना से निश्चित रूप से कड़वाहट बढ़ गई थी।
हेसन ने कहा,
“हम हाथ मिलाना चाहते थे लेकिन निराशाजनक विपक्ष ने ऐसा नहीं किया। हम जिस तरह से खेले उससे निराश हैं लेकिन हम हाथ मिलाना चाहते थे। सलमान का मैच के बाद की प्रस्तुति में नहीं आना उस परिश्चय कारण और प्रभाव था जो हुआ।”
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने टीम को दी चेतावनी, कहा- भारतीय स्पिनरों के खिलाफ होगी असली परीक्षा

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज गेंदबाज वसीम अकरम का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के मुकाबले को लेकर रोमांच और प्रतिद्वंद्विता तो हमेशा रहेगी, लेकिन अंतत: ये केवल खेल है। एक टीम जीतेगी और एक टीम हारेगी, लेकिन दोनों देशों में हार पर खिलाड़ियों पर निजी हमले शुरू हो जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए हमें मैच को खेल की तरह लेना चाहिए।
एशिया कप में रविवार को भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला खेला जाएगा। वसीम अकरम ने ‘दैनिक जागरण’ के सवाल पर कहा, भारत-पाकिस्तान मैच की तीव्रता कभी कम नहीं होगी। जब भी भारत और पाकिस्तान खेलते हैं, मजा आता है। खिलाड़ियों को भी और दर्शकों को भी, लेकिन मेरी अपील है कि आखिरकार यह केवल एक खेल है। किसी को जीतना है, किसी को हारना है। हमें पश्चिमी देशों की तरह मानसिकता रखनी चाहिए। वहां लोग एक-दो दिन आलोचना करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं। हमारे यहां खिलाड़ी पर निजी हमले शुरू हो जाते हैं।
अकरम ने कहा, दोनों देशों के खिलाड़ियों को आक्रामक जरूर होना चाहिए लेकिन सम्मान बनाए रखना जरूरी है। खिलाड़ियों के व्यवहार का असर सीधे दर्शकों पर पड़ता है। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि 90 के दशक में इंटरनेट मीडिया नहीं था, खिलाड़ियों पर दबाव ज्यादा होता था। अब खिलाड़ी अपेक्षाकृत सहज रहते हैं और इंटरनेट मीडिया पर लोग इस प्रतिद्वंद्विता का मजा मीम बनाकर उठाते हैं।
रविवार के मैच को लेकर अकरम ने कहा कि पाकिस्तान की असली परीक्षा भारत के स्पिन आक्रमण के खिलाफ होगी। भारत की टीम टी-20 प्रारूप में भी मजबूत है। मेरा मानना है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती उनकी मध्यक्रम बल्लेबाजी होगी, जब वे भारत के स्पिनरों का सामना करेंगे। बुमराह को वे किसी तरह देख लेंगे, लेकिन वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव जैसे स्पिनरों को समझना आसान नहीं है। अगर आप उनकी गेंदबाजी को हाथ से पढ़ने के बजाय पिच के बाद समझने की कोशिश करेंगे, तो देर हो जाएगी। यही पाकिस्तान की मुश्किल हो सकती है।
जसप्रीत बुमराह की फिटनेस और उनके वर्कलोड मैनेजमेंट पर पूछे गए सवाल पर अकरम ने कहा कि यह पूरी तरह खिलाड़ी का निजी निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा, लोग कहते हैं कि बुमराह को किसी एक प्रारूप से हट जाना चाहिए। लेकिन यह निर्णय सिर्फ उसी का होना चाहिए। अभी भारतीय टीम प्रबंधन उसे सही तरह से मैनेज कर रहा है। भारत के पास बैकअप के तौर पर भी तेज गेंदबाज हैं। सिराज हैं, शमी फिट होने के बाद आएंगे और भी कई अच्छे विकल्प मौजूद हैं। इसलिए बुमराह पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।

