देहरादून। उत्तराखंड में मौसम तेजी से बदलते स्वरूप में दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां प्रदेश के कई जिलों में बारिश, आकाशीय बिजली और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है, वहीं दूसरी ओर सर्दियों में कम बारिश और बढ़ते तापमान ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल मौसम का पैटर्न सामान्य से काफी अलग नजर आ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के पर्वतीय जनपदों के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश गरज और चमक के साथ हो सकती है। वहीं 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। राज्य के मैदानी जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा, गरज और आकाशीय बिजली चमकने के आसार हैं।
मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
वहीं हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, ओलावृष्टि और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने का अंदेशा जताया गया है। इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
राजधानी देहरादून में आज आसमान में आंशिक से लेकर सामान्य रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। यहां अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। पौड़ी में बारिश शुरू होने से तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई है।
हालांकि मौसम में यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब इस साल सर्दियों में बारिश और बर्फबारी सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है। जनवरी और फरवरी के दौरान राज्य में लगभग 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि फरवरी महीने में यह कमी करीब 93 प्रतिशत तक पहुंच गई।
जिलों के स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक रही। पौड़ी में फरवरी के दौरान लगभग 99 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि टिहरी, चंपावत और चमोली में करीब 95 प्रतिशत तक बारिश कम रही। मैदानी जिलों देहरादून और हरिद्वार में भी लगभग 95 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।
बारिश और बादलों की कमी का सीधा असर तापमान पर पड़ा है। कई स्थानों पर फरवरी के दौरान अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस मौसम के लिहाज से असामान्य माना जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में भी तापमान करीब 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया।
उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर का कहना है कि यदि बारिश की कमी का यह क्रम आगे भी जारी रहा तो आने वाले महीनों में गर्मी सामान्य से अधिक पड़ सकती है। कई स्थानों पर तापमान अभी से सामान्य से करीब 5 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है।
पर्यावरणविद प्रोफेसर एसपी सती के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। यदि बारिश और बर्फबारी में कमी का सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल स्रोतों, खेती और पर्यावरण पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 की शुरुआत ही इस बात के संकेत दे रही है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में अब अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। यदि आने वाले महीनों में मौसम सामान्य नहीं हुआ तो उत्तराखंड समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र को इस साल अधिक गर्मी और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

