नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के कड़े विरोध के बावजूद ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने रविवार को फिलिस्तीन को एक संप्रभु देश के तौर पर मान्यता देने का ऐलान कर दिया। तीनों देशों का यह कदम कॉमनवेल्थ की समन्वित पहल माना जा रहा है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय हमास को “इनाम” नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके फैसले का उद्देश्य फिलिस्तीन और इजरायल के नागरिकों के लिए शांति और उम्मीद की बहाली है। स्टारमर ने दो-राज्यों के समाधान को ही स्थायी शांति का रास्ता बताया।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि उनका देश फिलिस्तीन को मान्यता दे रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम मध्य पूर्व में शांति का मार्ग खोलेगा।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह मान्यता फिलिस्तीनी लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं और दो-राज्यों के समाधान के प्रति ऑस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
दूसरी ओर, इजरायल ने इस फैसले की तीखी आलोचना की। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीन को देश के रूप में मान्यता देना इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा है और “आतंकवाद को इनाम” देने जैसा है। उन्होंने वादा किया कि उनका देश इस प्रयास का हर स्तर पर विरोध करेगा।
गौरतलब है कि अब तक 140 से अधिक देश फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान और देशों से ऐसे कदम की उम्मीद जताई जा रही है।

