नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और वह अपने अधिकारों के तहत ही काम करता है। अदालत ने कहा कि यदि आयोग की ओर से एसआईआर में किसी भी तरह की कानूनी गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसे किसी भी स्तर पर रद्द किया जा सकता है।
कोर्ट ने इस दौरान बिहार समेत देशभर में शुरू होने वाले एसआईआर पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, “एसआईआर एक चुनावी प्रक्रिया है, हम इस पर रोक नहीं लगा सकते।”
रोक की मांग पर सुनवाई
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि आयोग मनमाने तरीके से बिहार में एसआईआर पूरी कर रहा है और 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने वाला है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से दखल देने और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
इस पर कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यदि इसमें कोई कानूनी त्रुटि पाई गई तो इसे रद्द किया जा सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की है।
चुनाव आयोग का पक्ष
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने भी मामले को टालने की मांग की थी। अदालत ने साफ किया कि बिहार एसआईआर पर दिए गए उसके निर्देश पूरे देश में लागू होंगे। गौरतलब है कि पहले ही कोर्ट ने आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल करने का अहम निर्देश दिया था।
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि चुनाव आयोग अब देशभर में एसआईआर कराने जा रहा है, ऐसे में इस मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

