नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सोमवार से अब तक का सबसे बड़ा जनविद्रोह शुरू हो गया। पाकिस्तान के शोषण और जुल्मों से तंग आ चुके लोगों ने “शटरडाउन” और “व्हील-जाम” हड़ताल का ऐलान किया। नतीजा यह रहा कि पीओके के लगभग हर इलाके में दुकानें-प्रतिष्ठान बंद रहे और हजारों लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
क्यों टूटा सब्र का बांध?
- बिजली लूट: मंगला डैम से 1400 MW बिजली का उत्पादन, 80% पंजाब-सिंध को भेजी जाती है, जबकि POK में 2 रुपये की बिजली 60–80 रुपये यूनिट में मिलती है।
- महंगाई की मार: 40 किलो गेहूं की बोरी 3100 रुपये में बिक रही।
- पानी की किल्लत: ग्रामीण घरों में 50% से अधिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं।
- स्वास्थ्य सुविधा की कमी: डेढ़ लाख की आबादी पर एक अस्पताल, दवाइयों-डॉक्टरों की भारी कमी।
- खनन का शोषण: सोना और यूरेनियम के 2000 से ज्यादा लाइसेंस चीनी कंपनियों को दिए गए, स्थानीयों को रोजगार या मुआवजा नहीं।
- मानव तस्करी: हर साल 200–300 महिलाएं पंजाब भेजी जाती हैं।
विद्रोह कुचलने में जुटी पाक सेना
इस्लामाबाद सरकार ने हालात काबू से बाहर होते देख पंजाब प्रांत से हजारों सैनिक बुलाए। पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और फायरिंग हुई जिसमें 3 लोगों की मौत और कई घायल हुए। इससे गुस्सा और भड़क गया।
38 सूत्रीय मांगों के साथ अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने आंदोलन की अगुवाई की। प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर ने कहा
“हमारा अभियान किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि 70 साल से वंचित अधिकारों की बहाली के लिए है। अब बहुत हो गया। या तो अधिकार दो या जनता के गुस्से का सामना करो।”
13 घंटे चली बैठक के बाद भी AAC और पाकिस्तान सरकार के बीच वार्ता टूट गई। AAC ने साफ कह दिया कि जब तक शोषण और विशेषाधिकार खत्म नहीं होंगे, आंदोलन जारी रहेगा।
मुजफ्फराबाद समेत कई शहरों में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और इंटरनेट बैन ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और भड़का दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह विद्रोह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आज़ादी की नई पटकथा लिखेगा?

