नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में महिला उत्पीड़न मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है और विपक्षी महिला को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आरोपों का समाधान खोजने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। यह याचिका मुक्त विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र सिंह की ओर से दाखिल की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में तत्कालीन कुलपति प्रो. ओ.पी.एस. नेगी ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं। नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जिन्हें स्क्रीनिंग कमेटी ने अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके साथ ही राज्य की महिलाओं के लिए अनिवार्य 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को भी नजरअंदाज किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन अनियमितताओं की शिकायत राज्यपाल को की गई थी। इसके बाद संबंधित महिला ने राज्यपाल और एससी आयोग को पत्र भेजकर उन पर उत्पीड़न का आरोप लगा दिया।
मामले की जांच के लिए 2023 में विश्वविद्यालय ने एक समिति गठित की थी। लंबे समय तक कोई कार्रवाई न होने के बाद हाल ही में समिति ने याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस नोटिस पर रोक लगाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि लगाए गए आरोपों का समाधान ढूंढना आवश्यक है।

