भालुओं की दहशत, ग्रामीण कामकाज व बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

Spread the love

हल्द्वानी। विकासखंड थत्यूड़ और वन प्रभाग मसूरी की जौनपुर रेंज के अंतर्गत ग्राम मंजपुर और मेड में इन दिनों भालुओं के दिखने से ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चार भालू लगातार गांव के आस-पास देखे जा रहे हैं, जिससे लोग खेतों, बाजार और बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। छह साल में 32 हमले, मानव-भालू संघर्ष बढ़ा है।

ग्रामीण सुंदर लाल चमोली, राम प्रकाश चमोली, हीरामणी गौड का कहना है कि भालुओं की मौजूदगी से खेती-बाड़ी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। पशुओं के लिए चारा-पत्ती लाना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द समाधान की मांग की है।

देवलसारी रेंज अधिकारी लतिका उनियाल ने बताया कि क्षेत्र में प्रतिदिन तीन गश्ती टीमें तैनात की गई हैं, जो सुबह और स्कूल छुट्टी के समय विशेष निगरानी करती हैं। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में झाड़ी कटान ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है।

शीतनिद्रा का समय, फिर भी हमलावर क्यों?

  • भालू सामान्यतः सर्दियों में शीतनिद्रा में चले जाते हैं, लेकिन लंबे समय से उनके व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है।
  • वर्ष 2020 व 2021 में भी इसी समय भालुओं के हमलों की घटनाएं बढ़ गई थीं।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस सत्याकुमार के अनुसार,
  • शीतनिद्रा के लिए भालुओं को ठंड, बर्फबारी और जंगल में पर्याप्त भोजन की आवश्यकता होती है।
  • वर्तमान में फल-फूल और प्राकृतिक भोजन की कमी तथा कम बर्फबारी के कारण भालू आबादी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।
  • कूड़ेदान और गांवों के कचरा स्थल भालुओं के लिए आसान भोजन बन गए हैं।

मानव-भालू संघर्ष रोकने के कदम

  • उत्तराखंड में इस वर्ष 5 मौतें और 72 लोग घायल हो चुके हैं।
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वन विभाग ने: भालुओं के व्यवहार व आक्रामकता का वैज्ञानिक अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।
  • गंभीर घायल के लिए 10 लाख रुपये तक की अनुग्रह राशि प्रस्तावित की है।
  • गांवों के पास कचरा निस्तारण कड़ाई से लागू करने की तैयारी की है।
  • सुरक्षा के लिए बीयर स्प्रे उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
  • भालू प्रभावित सभी क्षेत्रों का अध्ययन एक कमेटी के माध्यम से कराया जाएगा।

ग्रामीणों की मांग

  • भालुओं को बस्ती से दूर सुरक्षित क्षेत्र में भेजा जाए
  • गांवों में रात व सुबह अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था
  • स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा