पंचायत चुनाव के बाद अब 2027 में शुरू होगी सियासी नौटंकी

Spread the love

हल्द्वानी। नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के चुनाव को लेकर चल रहा है सियासी ड्रामा हाईकोर्ट की फैसले के बाद समाप्त हो गया। भाजपा और कांग्रेस की पैरवी करने वाली जनता शायद इस फैसले के बाद अपने को ठगा आसान महसूस कर रही होगी। क्योंकि जिस पद के लिए धनबल और बाहुबल का प्रयोग कर दोनों पार्टियों की ओर से अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ी जा रही थी, वह हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की औपचारिक घोषणा के बाद समाप्त हो गई। 

पुरानी कहावत है कि यह जनता है सब जानती है। उसी जनता को शायद यह पहले से पता था की जिसकी सरकार है उसी का पदाधिकारी उच्च पदों पर आसीन होगा।

नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए किसी ने सोशल मीडिया का सहारा लिया, तो कोई कुमाऊं के आराध्य देव गोल्ज्यू को साक्षी मानकर उनसे फरियाद लगाई। प्रश्न यह है कि राजनीतिक पार्टियों की लड़ाई में भगवान कैसे सहारा बन सकते हैं। वह भी तब जब गलत को सही दिखाने का प्रयास किया जा रहा हो और रही सही कसर जिला पंचायत उपाध्यक्ष हुए टॉस के बाद पूरी हो गई।

नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद भाजपा की दीपा दरम्वाल को अध्यक्ष और कांग्रेस की देवकी बिष्ट उपाध्यक्ष बनीं है। अब सोचने वाली बात यह है कि दो चरणों में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जिस पद के लिए योग्य व्यक्ति का चुनाव फैसला जनता के चुने हुए प्रत्याशियों की ओर से किया जाना था, उस पद पर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने हथौड़े की चोट के बाद फैसला सुनाया है। अब इसे विडंबना बना कहा जाए या कुछ और कि कांग्रेस की प्रत्याशी पुष्पा नेगी को मात्र एक वोट से पराजित होना पड़ा। एक वोट के रद्द होने से अध्यक्ष पद का चुनाव भी बिना टॉस के संपन्न हो गया। 

नैनीताल जिला कोषागार में जिला पंचायत अध्यक्ष के परिणामों की घोषणा की गई, जिसमें भाजपा प्रत्याशी को 11 और कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पा नेगी को 10 वोट हासिल हुए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी को बराबर मत हासिल हुए। अब जनता के लिए सबक लेने वाली बात यह है कि जो काम लोगों ने लंबी लाइन में लगकर करने का प्रयास किया था उसका परिणाम एक टॉस अर्थात सिक्का उछालने मात्र से पूरा हो गया। देवकी बिष्ट जिला पंचायत उपाध्यक्ष पद पर विजई हुई। 

फिलहाल 14 अगस्त को नैनीताल में हुए सियासी नौटंकी के बाद आखिरकार नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव संपन्न हो गया है। कांग्रेस के जिन वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने अपने समर्थक के लिए धक्का-मुक्की और मारपीट सहन थी, उसका फल उन्हें उपाध्यक्ष का पद मिलने से पूरा हो गया है।

कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की और से एसएसपी और जिलाधिकारी की भी सुनवाई की जा चुकी है। न्यायाधीशों ने दोनों अधिकारियों को नियम और कानून का पाठ पढ़ा दिया है।

अब बारी आती है अपहरण हुए पांच जिला पंचायत सदस्यों की। लालच, भय और बहकावा। शायद ऐसा ही कोई कारण हो जो जनता के विश्वास से भी ऊपर है। ग्रामीणों की ओर से अपने क्षेत्र के विकास के लिए कुछ ऐसे लोगों को चुना गया जो केवल सत्ता एवं पैसों की अधीन थे। पांचो सदस्यों की कोर्ट ने बात सुनने से साफ इन्कार कर दिया। न्यायाधीश पांचो की अपहरण अथवा घूमने की कहानी नहीं सुनना चाहते। 

गौरतलब है कि बहुचर्चित जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव और सदस्यों के अपहरण प्रकरण पर सोमवार को लापता हुए पांच सदस्य भी कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उनकी बात सुनने से साफ इन्कार कर दिया। न्यायाधीशों के अनुसार जब पांचो सदस्य वे लापता हुए ही नहीं थे तो बयान मजिस्ट्रेट के पास किस आधार पर दर्ज किए? पूछा कि जब अपहरण हुआ ही नहीं है तो पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में क्यों रखा?

बहरहाल मामला शांत हो चुका है। जिसकी लाठी उसकी भैंस के आधार पर फैसला सुनाया गया है। अब वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर फिर से नेता और जनप्रतिनिधि जनता की चौखट पर पहुंचेंगे। तो सावधान रहें, सजग रहे और अपनी वोट की कीमत पहचाने।