“जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा बाँजगांव मणि: गुप्तेश्वर महादेव धाम में नव दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ का भव्य समापन”

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खेतीखान/बाँजगांव। देवभूमि की पावन धरती पर स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, ग्राम बाँजगांव मणि में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन क्षेत्र सहित दूर-दराज़ के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया। मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के उद्घोष और वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्तिरस में डूबा नजर आया।

कथा व्यास पूज्य आचार्य नकुल पंत जी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, धर्मपालन, मर्यादा और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को सत्य, सेवा, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा के दौरान भगवान राम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्तिभाव से सराबोर हो गया।

समापन अवसर पर विधि-विधान के साथ विशाल यज्ञ एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की। यज्ञ की दिव्य अग्नि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

कार्यक्रम में बागेश्वर स्थित बाबा बागनाथ धाम के महामण्डलेश्वर सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। संतों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सनातन संस्कृति के संरक्षण का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।

इस सफल आयोजन में भक्ति भाव सेवा परिवार के संस्थापक आचार्य नकुल पंत जी महाराज एवं उनकी समर्पित टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति ने कथा, यज्ञ और समस्त व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले ग्रामवासियों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के समापन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। नौ दिनों तक चले इस आध्यात्मिक महोत्सव ने क्षेत्र में भक्ति, एकता और सनातन संस्कृति के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया तथा श्रद्धालुओं के मन में धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था को और मजबूत किया।