बांग्लादेश में नई सरकार: समावेशन का संकेत और पड़ोस नीति की नई दिशा

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बांग्लादेश में 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन ने दक्षिण एशियाई राजनीति को नई चर्चा दे दी है। दो-तिहाई बहुमत के साथ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार बनना और उसके अध्यक्ष तारिक़ रहमान का प्रधानमंत्री पद की शपथ लेना एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन द्वारा शपथ दिलाए जाने के साथ ही देश में नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो चुकी है।

प्रचंड जनादेश, बड़ी जिम्मेदारी

बीएनपी और उसके सहयोगियों की 212 सीटों पर जीत यह दर्शाती है कि मतदाताओं ने स्पष्ट और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन और अंतरिम शासन की अवधि के बाद जनता ने निर्णायक जनादेश दिया है। लेकिन लोकतंत्र में बहुमत के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है विशेषकर तब, जब संवैधानिक सुधारों को लेकर पहले ही बहस शुरू हो चुकी हो।

मंत्रिमंडल में हिंदू नेता : विश्वास का संदेश

नई सरकार में एक प्रमुख हिंदू नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग है, और सत्ता संरचना में उनकी भागीदारी सामाजिक संतुलन और विश्वास निर्माण के लिए आवश्यक है।

यह निर्णय घरेलू राजनीति में समावेशन का संदेश देता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी यह संकेत देता है कि नई सरकार विविधता को स्वीकार करने और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की इच्छुक है।

भारत के साथ रिश्ते: व्यावहारिक सहयोग या नई पुनर्समीक्षा?

भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले वर्षों में व्यापार, संपर्क मार्ग, सुरक्षा सहयोग और ऊर्जा साझेदारी के क्षेत्र में मजबूत हुए हैं। नई सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह इन संबंधों को व्यावहारिक और संतुलित ढंग से आगे बढ़ाए। सीमा प्रबंधन, अवैध आव्रजन, जल बंटवारा और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर नई दिल्ली और ढाका के बीच संवाद की निरंतरता जरूरी होगी। यदि नई सरकार संतुलित और परिपक्व नीति अपनाती है, तो दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो सकते हैं। हालांकि बीएनपी की पूर्व राजनीतिक स्थिति को देखते हुए कुछ नीतिगत पुनर्समीक्षा भी संभव मानी जा रही है।

पाकिस्तान के साथ रिश्ते: ऐतिहासिक संदर्भ और नई संभावनाएँ

पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। बीएनपी की राजनीतिक सोच परंपरागत रूप से इस्लामाबाद के प्रति अपेक्षाकृत नरम मानी जाती रही है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संवाद में कुछ नई सक्रियता दिखाई दे सकती है।

हालांकि यह भी स्पष्ट है कि ढाका किसी एक धुरी की ओर झुकाव दिखाने के बजाय संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश करेगा, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हित सुरक्षित रह सकें।

लोकतंत्र की असली परीक्षा

नवनिर्वाचित सांसदों को मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन द्वारा शपथ दिलाए जाने के साथ ही संवैधानिक सुधार परिषद को लेकर उठा विवाद यह संकेत देता है कि राजनीतिक बहस अभी समाप्त नहीं हुई है।

नई सरकार के सामने असली चुनौती यही है कि वह प्रचंड बहुमत को संवाद, पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती में बदल सके।

तारिक़ रहमान के नेतृत्व में बनी सरकार के पास ऐतिहासिक अवसर है देश के भीतर सामाजिक समावेशन को मजबूत करने और पड़ोसी देशों के साथ संतुलित एवं व्यावहारिक संबंध स्थापित करने का।

यदि नई सरकार समावेशी शासन, संतुलित विदेश नीति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करती है, तो बांग्लादेश न केवल आंतरिक स्थिरता बल्कि दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभर सकता है।