बसंत पंचमी पर प्रकृति का वरदान: बारिश–बर्फबारी से खिले पहाड़, मुस्कुराए किसान और सैलानी

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हल्द्वानी। उत्तराखंड में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर प्रकृति ने ऐसा सौगात दिया, जिसने लंबे समय से सूखे आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। एक महीने बाद हुई बारिश और ऊँचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने न सिर्फ मौसम को खुशनुमा बना दिया, बल्कि पर्यटन और खेतीदोनों के लिए नई उम्मीदें जगा दीं।

राज्य के पर्वतीय जिलों में हुई ताज़ा बर्फबारी से जहां पहाड़ों ने एक बार फिर सफेद चादर ओढ़ ली, वहीं मैदानी इलाकों में हुई बारिश ने गेहूं, सरसों और बागवानी फसलों को जीवनदान दिया। लंबे समय से नमी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं रही। खेतों में हरियाली लौटने की उम्मीद ने किसानों के चेहरों पर राहत की चमक साफ दिखाई दी।

बसंत पंचमी को विद्या, संगीत और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस दिन हुई वर्षा और बर्फबारी को लोग शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। पर्यटन स्थलों नैनीताल, मसूरी, औली और मुक्तेश्वर में बर्फबारी की खबर मिलते ही पर्यटकों की आमद बढ़ गई। होटलों और होम-स्टे संचालकों में भी रौनक लौट आई है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी संजीवनी मिली है।

हालांकि, बदलते मौसम के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में फिसलन और सड़क अवरोध जैसी चुनौतियां प्रशासन के सामने हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह मौसम बदलाव उत्तराखंड के लिए राहत और खुशहाली का संदेश लेकर आया है।

बसंत पंचमी पर प्रकृति का यह उपहार याद दिलाता है कि जब कुदरत मेहरबान होती है, तो वह केवल मौसम ही नहीं बदलती, बल्कि लोगों के मन और भविष्य की उम्मीदों को भी नई दिशा दे देती है।