देहरादून में ‘पहचान का खेल’! कई नाम, कई दस्तावेज… बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार

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देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत देहरादून पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। फर्जी पहचान, कई नाम और दर्जनों जाली दस्तावेजों के सहारे देहरादून में रह रही एक बांग्लादेशी महिला को पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। महिला कोविड काल के दौरान अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आई थी और वर्षों से कानून को चकमा दे रही थी।

लोक संस्कृति कॉलोनी में रह रही महिला खुद को सुबेदा बीबी पत्नी कौशर शाह बताती थी, लेकिन पूछताछ में उसने अपना असली नाम सुबेदा बेगम पुत्री सादिक मियां, निवासी बांग्लादेश स्वीकार किया। भारत में टिके रहने के लिए महिला ने पश्चिम बंगाल में निकाह किया और उसके बाद उत्तराखंड में जाली दस्तावेजों की पूरी फाइल तैयार कर ली।

निकाह बना ढाल, दस्तावेज बने हथियार

पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022 में महिला ने पश्चिम बंगाल निवासी कौशर शाह से विवाह किया। दो साल बाद वह देहरादून पहुंची, जहां रुड़की और देहरादून से अलग-अलग नामों पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अहम भारतीय पहचान पत्र तैयार कर लिए गए।

तीन नाम, एक चेहरा

पुलिस ने महिला के पास से सुबेदा बीबी और मोनी के नाम के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, सुबेदा बीबी, मोनी और प्रिया राय के नाम से बने वोटर आईडी कार्ड, सुबेदा बीबी के नाम का आधार और पैन कार्ड तथा सुबेदा बेगम के नाम से जारी बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि महिला अलग-अलग नामों से पहचान बदलकर रह रही थी।

पति दुबई में, देहरादून में घरेलू काम

देहरादून में महिला किराये के मकानों में रहकर घरों में झाड़ू-पोंछा करने का काम कर रही थी, जबकि उसका पति कौशर शाह दुबई में नौकरी कर रहा है। फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही, इसे लेकर पुलिस की जांच तेज कर दी गई है।

कालनेमि की जकड़ में फर्जी पहचान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि महिला के खिलाफ पटेलनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की पहचान की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई होगी।

एसएसपी के अनुसार ऑपरेशन कालनेमि के तहत देहरादून जिले में अब तक 19 बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। इनमें से नौ को जेल भेजा गया है, जबकि 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है। पुलिस अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की तलाश में लगातार अभियान चला रही है।