UKSSSC पेपर लीक विवाद: पियूष जोशी ने आयोग के दावों को बताया खोखला, छात्रों की मांगों के अनुरूप कार्रवाई की मांग

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देहरादून/हल्द्वानी। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की 21 सितम्बर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा पर पेपर लीक विवाद गहराता जा रहा है। आयोग ने 30 सितम्बर को संवाद जारी कर आठ बिंदुओं में परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता का दावा किया, लेकिन अभ्यर्थियों और युवा संगठनों ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।

आयोग का कहना है कि प्रश्न पत्र डबल लॉक कोषागार में सुरक्षित रखे गए, परीक्षा केंद्रों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस निगरानी रही, अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 5G मॉडल जैमर सक्रिय रहे। आयोग ने दावा किया कि ओएमआर शीट्स की सीलिंग, सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की हेराफेरी संभव नहीं है। साथ ही SIT और CBI जांच का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

लेकिन छात्रों और विशेषज्ञों का आरोप है कि आयोग के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। कई केंद्रों पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे बंद कर दिए गए, अधिकांश जगह 4G जैमर ही लगाए गए जो निष्क्रिय साबित हुए, और यही वजह रही कि पेपर लीक हुआ। ओएमआर शीट्स की सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड युवा एकता मंच के संयोजक पियूष जोशी ने आयोग के सभी दावों को “कागजों पर बने खोखले आश्वासन” बताया। उन्होंने कहा,

 “जैमर की तकनीकी खामियां, सीसीटीवी की निगरानी ठप होना और पेपर का लीक होना आयोग की लापरवाही और अक्षमता को साबित करता है। छात्रों का धैर्य अब जवाब दे चुका है।”

जोशी ने मांग की कि स्नातक स्तरीय परीक्षा को तुरंत निरस्त किया जाए, CBI जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और आयोग का पुनर्गठन किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा।