भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को मिली बड़ी जीत, शहीदों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

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दिल्ली। नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठे जन-आंदोलन ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इसी बीच देश की बागडोर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को सौंपी गई है। 73 वर्षीय कार्की ने रविवार को अंतरिम प्रधानमंत्री पद संभालते हुए साफ कहा कि उनकी सरकार सत्ता का आनंद लेने नहीं, बल्कि देश को स्थिर करने आई है।

कार्की ने मीडिया से कहा, “हम यहां सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हमारी जिम्मेदारी सिर्फ छह महीने की है। इसके बाद हम सत्ता नए संसद को सौंप देंगे। बिना जनता के समर्थन के हम सफल नहीं हो सकते।”

उन्होंने ‘Gen Z’ युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन की सराहना की, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर किया। कार्की ने घोषणा की कि आंदोलन में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाएगा। मृतकों के परिवार को 10 लाख नेपाली रुपये मुआवजा, जबकि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी दी जाएगी।

‘द हिमालयन टाइम्स’ के मुताबिक, हाल की घटनाओं में अब तक 72 मौतें हुई हैं, जिनमें 59 प्रदर्शनकारी, 10 कैदी और 3 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

कार्की ने आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं योजनाबद्ध लगती हैं और संभव है कि इसके पीछे कोई साजिश हो। जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित लोगों को मुआवजा सॉफ्ट लोन या अन्य तरीकों से दिया जा सकता है।

अंतरिम प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि नेपाल इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनकी प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और पुनर्निर्माण कार्यों को तेज करना होगी।